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" अमृतसर ट्रेन हादसे के गुनाहगारो को जेल में डालो " पंजाब का खून ठंडा नहीं हो सकता है सारा देश चाहता है "सजा दो " आप का ये हस्ताक्षर सीधे कैप्टन साहब की टेबल पर इसी वक्त "SIGN PETITION"

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पंजाब के अमृतसर में दशहरे के मौके पर हुए हादसे में 58 लोगों की जान चली गई . जोड़ा फाटक के पास लोग रेलवे ट्रेक पर खड़े होकर रावण दहन देख रहे थे. इसी दौरान वे ट्रेन की चपेट में आ गए. हादसे में 50 के करीब लोगों के घायल होने की भी खबर है.

हादसे की जिम्‍मेदारी कोई लेने के लिये तय्यार नहीं है ,रेलवे   पल्ला पहले ही झाड़ लिया ,दशहरा आयोजन समिति और समिती के संचालक कहते फिर रहे है "ये हमारी गलती नहीं साथ में नवजोत सिंह की पत्नी का भी इसमें कोई दोष नहीं, नवजोत सिंह जी ने साफ़ कर दीया है ये " प्राकृतिक आपदा है " "इके एक्सीडेंट है' उससे ज्यादा कुछ नहीं.

कैप्टन साहब तो पास से तमाशा देख रहे है बस, ऐसा नहीं चलेगा साहब जवाब दो और कारवाही करो तुर्रंत वरना जनता चुप नहीं बैठेगी,

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने शुक्रवार को अमृतसर ट्रेन दुर्घटना में मारे गए लोगों के परिजनों के लिए पांच लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की है पर ये काफी नहीं है ​​​​​​, गुनेह्गारो को सजा दो पैसे से सब कुछ नहीं खरीदा जा सकता ?

दशहरा आयोजन समिति : रावण दहन आयोजन समिति की भूमिका पर सबसे ज्‍यादा सवाल उठ रहे हैं. समिति ने रेलवे ट्रेक के पास रावण दहन क्‍यों कराया, जबकि पता था कि दशहरा साल में एक बार आता है और ऐसे में काफी संख्‍या में लोग आएंगे. इसके अलावा आने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए भी कोई उपाय नहीं थे. लोग रेलवे ट्रेक पर खड़े थे जो कि मौत को बुलावा देना था. बताया जा रहा है कि हर साल इसी जगह पर रावण दहन होता है. इससे साफ होता है कि कई सालों से लोगों की जान दांव पर लगाई जा रही थी.

जिला प्रशासन: रेलवे ट्रेक के पास रावण दहन की अनुमति अगर जिला प्रशासन से मिली है तो यह बड़ी खामी है. हादसे से साफ होता है कि प्रशासन ने सुरक्षा व्‍यवस्‍था को लेकर गंभीरता नहीं बरती. मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने भी लोगों को रेलवे ट्रेक से हटाने के लिए कुछ नहीं किया. 

रेलवे: इस हादसे में रेलवे की भूमिका भी संदिग्‍ध है. जब रेलवे ट्रेक के पास कार्यक्रम हो रहा था तो ट्रेन परिचालन बंद क्‍यों नहीं किया गया या फिर ट्रेन की गति कम क्‍यों नहीं की गई. पास के रेलवे स्टेशन मास्‍टर को इस बारे में जानकारी नहीं थी ऐसा संभव नहीं है, क्‍योंकि इतना बड़ा कार्यक्रम गुपचुप ढंग से तो नहीं हो सकता.

रावण दहन की जगह को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. जिस जगह रावण का पुतला जलाया जा रहा था वह रेलवे ट्रेक से 70-80 मीटर ही दूर था. इसके चलते दहन देखने वाले लोग रेलवे ट्रेक पर भी खड़े थे. वहीं पुतले में आग लगाए जाने के बाद पटाखों की आवाज के चलते भी भगदड़ मची. ठीक इसी समय पर ट्रेन आ गई और लोग उसकी चपेट में आ गए.

इस कार्यक्रम में पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी मुख्य अतिथि थी और वो हादसे के बाद कार में बैठकर चली गईं। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, 'इससे पहले हमने कभी ऐसा मंजर नहीं देखा। नवजोत सिंह यहां से विधायक हैं और मंच पर उनकी पत्नी भी मौजूद थी लेकिन वो घटना के बाद मदद करने की जगह भाग गईं।'

जौड़ा फाटक रेलवे ट्रैक पर दशहरे पर हुए हादसे के मामले में स्थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू को समन जारी किया गया है परन्तु दोनों ने इस सम्मन को नज़र अंदाज़ कर देय है ऐसा क्यू ? कोई कानून व्यवस्था है के नहीं पंजाब में, पंजाब के निकाय मंत्री है नवजोत सिंह सिद्धू  जी कोई ज़िम्मेदारी बनती है के नहीं, क्या हर बात के लिये जनता रास्तो पर आये बी कुछ होता है ?

बहोत सारे मुद्दे है, इसकी जाच होनी चाहेए तब तक सारे दोशीयो को जेल में डालो फिर जाच करो वरना सारे सबोत गायब हो जायेगे और उचे पद के लोग सम्मन पर हाज़िर नहीं होगे और खुद को पाक साफ सभीत कर देगे ,

बचे व्हो जो मर गए, इन सब के मुताबिक जो मर गए है ये हे अपनी मोत के जिमेदार है ये नहीं , इनको ही प्रोग्राम में आने से पहले सब पता करना चाहिये था ,

  • रेलवे से इनको ही प्रोग्राम को देखने की अनुमती लेनी चाहेए थी 
  • प्रशन से पहले लिखित में पूछना चाहिये था के प्रोग्राम में जाये के नहीं ?
  • दशहरा आयोजन समिति से पहले पूछना चाहेए था की हमारा इन्सुरेंस करवाया के नहीं
  • पंजाब के अपने पंजाबी भाइयो से पुछ  के जाना चाहीये था "भाई हम मर जायेगे तो हमारे लिये लड़ोगे के नहीं ?
  • नवजोत सिंह जी और  नवजोत कौर सिद्धू  जी से भी पूछना भूल गए ,साहब मरने के बाद  गुनेह्गारो को सजा दिलवाओगे  ?
  • नहीं  पूछा  डायरेक्ट मर गए ,अब सब आज़ाद कोई नहीं है इसमें गुनेह्गर सर हम जो मर गए है व्हो हे है असली गुनेह्गर ???   

बहोत कुछ लिकना है पर मन भर गया है बस आगे पंजाब की मर्जी ? कोन इनको दिलाएगा इंसाफ "पंजाब या रावण रूपी राजनीती "

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